क्यूँ महा शिवरात्रि को काल रात्रि भी कहते हैं ?

महाशिवरात्रि हिंदुओं का एक प्रमुख त्योहार है इस त्यौहार में भगवान शिव जी की पूजा की जाती है महाशिवरात्रि को कालरात्रि भी कहा जाता है । क्योंकि इस दिन मध्य रात्रि को भगवान शिवजी ब्रम्हा से रूद्र रूप में आमने-सामने हुए थे । इसी दिन उन्होंने भयंकर तांडव करके अपना तीसरे नेत्र को खोलकर ब्रह्मांड को जला दिया था, ऐसा भी माना जाता है कि इ स दिन भगवान शिव जी का विवाह हुआ था। साल में महाशिवरात्रि 12 से शिवरात्रि के बाद आती है जो कि बहुत ही महत्वपूर्ण है। महाशिवरात्रि का सबसे ज्यादा महत्व महिलाओं के लिए भी है ऐसा माना जाता है कि जो अविवाहित महिलाएं हैं वह भगवान शिव से प्रार्थना करती है कि उन्हें भगवान शिव जैसा ही पति मिले और उनके जैसा ही परिवार मिले। महाशिवरात्रि वाले दिन सभी भक्तों बड़े धूमधाम से शिव जी की पूजा करते हैं मंदिरों में जाकर भक्तजन उनके शिवलिंग पर बेलपत्र चढ़ाते हैं दूध, दही ,शहद से उनका स्नान करते हैं तथा उस दिन बहुत से लोग उपवास भी रखते हैं और रात को जागरण करते हैं।

शिवजी पर बहुत से लोग बेलपत्र बेल आदि चढ़ाते हैं ऐसा माना जाता है कि शिवजी पर बेलपत्र चढ़ाना शिवजी  को बहुत पसंद है इसी दिन रात को भगवान शंकर की बारात निकाली जाती है और रात भर जागरण किया जाता है।बहुत लोग ऐसा मानते है कि शिवरात्रि के दिन शिव जी का उपवास रखने से या उनके लिंग पर जल चढ़ा के उनको बेलपत्र बेल चढ़ा के जो भी मांगेंगे वो आप को जरूर मिलेगा ।ऐसा भी मना जाता है कि शिव जी बहुत भोले है वो सभी भक्तों को बात सुनते है और उनको वैसे ही आशीर्वाद भी प्रदान करते है इसीलिए हमको उस दिन शिव जी के लिंग की पूरी दिल से पूजा करनी चाहिए और उनकी भक्ति भी करनी चाहिय ।

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