भगवान शंकर क्यों करते थे भांग का सेवन

कहा जाता है की पौराणिक कथाओं के अनुसार ,शिव जी ने जब देव एवं दानव दोनों ही एक साथ मिलकर पावन पवित्र अमृत की चाह में समुद्र में मंथन कर रहे थे ,तो अमृत के साथ साथ विष भी निकला था । अमृत विष्णु जी स्त्री का रूप धारण करके ले गए ,जो बचा हुआ विष था । जिस की एक भी बूंद सृष्टि को  नुकसान पहुंचा सकती थी पर शिवजी ने इस विष को इकट्ठा करके पी लिया । शिवजी इसलिए भांग धतूरा का सेवन करते थे कि शिवजी पर कोई भी विष का असर नहीं होता है। पर यह काम केवल शिव जी ही कर सकते हैं और हमें समझना चाहिए कि शिवजी पर संसार के बनाए हुए विष का कोई असर नहीं होता है । वह तो प्रभु है और उनमें विश्व को खत्म करने की शक्ति है , शिव जी तो बुराइयों को पीने में निपुण थे । शिव  जी तो भगवान थे फिर भी वह नशीले पदार्थ का सेवन करते थे कि भक्तों पर कोई घातक संकट ना आए, शिव  तो भगवान हैं अपने भक्तों को सही रास्ता दिखाते हैं भगवान शंकर जब विष का सेवन कर लिए थे , तो शिवजी खुश होते थे । शिव जी भांग धतूरा का सेवन करते थे जब हम भगवान शंकर की आराधना करें या पूजा करें उन्हें भांग  धतूरा जरूर चढ़ाएं ,क्योंकि वह भांग से बहुत ज्यादा प्रसन्न होते हैं । वह भांग धतूरा का सेवन इसलिए करते थे कि भक्तों पर कोई संकट ना आने पाए और खुद अपने आप ही सारा विष पी जाते थे । संसार को अमृत पिलाते थे आप भांग-धतूरा पीते थे क्योंकि वे संसारी नहीं थे। भगवान शंकर भांग धतूरा में प्रसन्न रहते थे वह शिवरात्रि के दिन भी भांग धतुरा पिए करते हैं। भांग-धतूरा पीकर मस्ती आ जाती थी भांग पीकर नाचते थे। भांग और धतूरा बहुत ही प्रिय है , भांग धतूरा अपने प्रसंता के लिए सेवन करते थे इसलिए हमें भी भगवान को शिव कोें भांग धतूरा का प्रसाद चढ़ाना चाहिए।

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