कौए के पास है शक्ति पूर्वजों की आत्मा को शांति पहुँचाने की

आप सभी ने सुना होगा की पितरों की तृप्ति के लिए कौए को भोज दिया जाता है लेकिन ऐसा क्यूँ होता है?कैसे कौआ हमारे पितरों तक पहुँच पाता है ?आख़िर क्या रहस्य है इसके पीछे?

दरसल जिस वक्त श्री राम,माता सीता और लक्ष्मण सहित 14 साल का वनवास काट रहे थे ,एक दिन जब प्रभु श्री राम सीता माता के पास विश्राम कर रहे थे तभी एक कौआ सीता माता को परेशान करने लगा , वह कौआ कोई साधारण पंछी ना होकर इंद्र का पुत्र जयंत था

, सीता माता को विचलित महसूस कर अचानक श्री राम की आँख खुली और उनकी रक्शा हेतु उन्होने बान साध लिया

श्री राम ने उसे पहचान लिया और क्रोधित हो उसे मारने को आगे बड़े

यह देख जयंत डर गया और उनसे माफी माँगने लगा

श्री राम ने उससे माफ़ तो कर दिया पर उससे कहा की मैं यह तीर को कमान पर चड़ा चुका हूँ यह खाली नही जा सकता ,उन्होने वह तीर उसकी एक आँख पर चला दिया और कहा  कि तुम एक आँख से ही देख सकोगे परंतु उतना भी देख सकोगे जितना आम इंसान दो आँखों से भी नही देख सकता

तुम पूर्वजों को देख सकोगे ,साथ ही जो कोई भी तुम्हे भोजन कराएगा उसके पितरों की आत्मा को शांति मिलेगी

तदपश्चात यह पितरों को तृप्त करने और उनकी आत्मा की शांति के लिए श्रादों में  कौए को भोजन  कराने  की प्रथा चली आ रही है

 

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