क्यूँ करनी चाहिए आसन पर बैठकर पूजा ?

क्या आप आसान पर बैठ कर पूजा करते हैं ? अगर नही तो आज हम आपको यह बताएँगे कि क्यूँ आसन पर बैठकर पूजा करनी चाहिए. दरसल यह केवल आराम का मामला नहीं है, बल्कि इसके पीछे वैज्ञान से जुड़े कारण भी जुड़े है.
दोस्तों आसन पर बैठकर पूजा करने से पूरा फल तो मिलता ही है, साथ ही जब ज़मीन और हमारे शरीर के बीच आसन होता है तो पूजा के समय जागृत उर्जा का अपने लिए सही इस्तेमाल कर सकते हैं

दोस्तों जैसे के यह सर्व वीदित है कि पृथ्वी में विद्युत और चुंबकीय तरंगे प्रवाहित होती हैं. जब कोई जप करता है या पूजा-पाठ करता है , तो उस समय ऊर्जा पैदा होती है और यदि व्यक्ति आसान पर ना बैठ हो तो पूजा के समय पैदा हुई सकारात्मक ऊर्जा सीधे पृथ्वी में चली जाती है और जातक उसका लाभ नही उठा पाता और वहीं दूसरी तरफ यदि व्यक्ति आसान पर बैठ कर पूजा करता है तो उससे उसके शरीर और धरती के बीच सीधा संपर्क नही बनता और पूजा से पैदा हुई सकारात्मक ऊर्जा पृथ्वी में जाने से बच जाती है और जातक इस कारण पूजा से जागृत उर्जा का पूर्ण लाभ उठा पाता है

तो चलिए जानते हैं की कैसे आसान पर बैठना चाहिए ?

1. सफेद वस्त्र की आसन पर बैठकर की गई जाप-यश ख्याति में वृद्धि प्रदायक। 
2. हल्दी से रंगे वस्त्र पर बैठकर की गई जाप-हर्षप्रदायक।
3. लाल वस्त्र (श्रेष्ठ आसन) पर की गई जाप-सुख प्रदायक।
4. डाभ की आसन पर की गई जाप-यह सर्वश्रेष्ठ आसन है। सभी कार्यों की सिद्धि में लाभदायक है।

किस रंग के आसन पर बैठना उचित नही माना जाता ?

बांस बैठकर किया जाप-दरिद्रता प्रदायक। धरती पर (पृथ्वी पर) बैठकर किया जाप-दुर्भाग्य या भाग्यहीन प्रदायक। घास पर बैठकर की गई जाप-चित्त की चंचलता, अस्थिरता प्रदायक।हिरण, शेर, बाघ आदि जानवरों के चमड़े की छाल पर बैठकर की गई जाप-अज्ञानता प्रदायक या ज्ञान हरती है।नीले वस्त्र पर बैठकर की गई जाप-दुख प्रदायक।हरे वस्त्र पर बैठकर की गई जाप-मान भंग में कारण बनती है।

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