गोवर्द्धन पूजा

गोवर्धन पूजा दिवाली के अगले दिन मनाई जाती है।  गोवर्धन पूजा के दिन घर केआंगन में गोबर से गोवर्धन पर्वत, गायों आदि की आकृति बनाकर पूजा-अर्चना की जाती है। उसके बाद उसकी श्रद्धा पूर्वक परिक्रमा करके सबको छप्पन भोग का प्रसाद बांटा जाता है।इतना ही नहीं, इस दिन 56 या 108 तरह के पकवान बनाकर श्रीकृष्‍ण को उनका भोग लगाया जाता है. इन पकवानों को ‘अन्‍नकूट’ कहा जाता है
ऐसा विश्वास है की भगवान श्रीकृष्ण ने गोवर्धन पर्वत को अपनी छोटी अंगुली से उठाकर हजारों जीव-जतुंओं और बृजवासियों की रक्षा की थी और उनको भगवान इंद्र के कोप से बचाया था
गोवर्धन पूजा के दिन गोबर से गोवर्धन की आकृति तैयार करने के बाद उसे फूलों से सजाया जाता है और सूर्या अस्त होने पर शाम के समय इसकी पूजा की जाती है। पूजा में धूप, दीप, दूध, जल, फल, बताशे आदि का इस्तेमाल किया जाता है।ऐसी मान्यता है की इस दिन गोवर्धन पर्वत जो की मथुरा में स्थित है उसकी यदि कोई व्यक्ति परिक्रमा करता है तो उसके जन्म जन्मान्तर के पाप मिट जाते है और उसको मोक्ष प्राप्ति होती है। साथ ही उसके रुके हुए कार्य भी सरलता से बिना किसी रुकावट पूर्ण हो जाते है
उसी गोवर्धन पर्वत का प्रतीक बनाकर इस दिन लोग उसकी परिक्रमा करते हैं और भगवान के आशीर्वाद का लाभ उठाते हैं

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